
धूल भरे वातावरण में, सामान्य UV लैंप काम ही नहीं कर पाते; ऐसे में उनका जीवनकाल भी कम हो जाता है। धूल, रिफ्लेक्टर पर जम जाती है, जिससे लैंप की कार्यक्षमता कम हो जाती है। हमने इस समस्या को ध्यान में रखकर “क्वार्ट्ज UVC T5” नामक लैंप बनाया। इसमें उच्च शुद्धता वाला क्वार्ट्ज रिफ्लेक्टर है, जिससे लैंप की सतह हमेशा साफ रहती है। ऐसी संरचना से लैंप की परावर्तन क्षमता बनी रहती है, एवं ऊष्मा प्रबंधन भी ठीक रहता है।
इस लैंप की विशेषताएँ:
यह T5 आकार का लैंप है, जिसमें उच्च शुद्धता वाला क्वार्ट्ज रिफ्लेक्टर है। यह ओजोन-रहित वातावरण में भी काम करता है, एवं 254 नैनोमीटर तरंगदैर्घ्य पर स्थिर ऊर्जा उत्पन्न करता है। रिफ्लेक्टर केवल सौंदर्यदृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है; बल्कि यह एक सटीक ऑप्टिकल संरचना है, जो लैंप की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद करता है। भले ही वातावरण में धूल अधिक हो, फिर भी इस डिज़ाइन के कारण ऊर्जा उत्पादन स्थिर रहता है। 5,000 घंटों से अधिक समय तक इस लैंप की कार्यक्षमता स्थिर रहती है, एवं इसकी गुणवत्ता में कमी नहीं आती। इससे लक्षित सतह पर आवश्यक ऊर्जा मात्रा हमेशा प्राप्त होती है।
कठिन परिस्थितियों में भी इसकी उपयोगिता:
धूल भरे वातावरण में भी, इस लैंप का रिफ्लेक्टर धूल को अंदर जाने से रोकता है; इससे लैंप की परावर्तन क्षमता एवं ऊष्मा संतुलन बना रहता है। आवश्यक समय पर ही आवश्यक स्थान पर ऊर्जा उपलब्ध होती है। UV क्षय प्रक्रिया में, इससे रंगीन परतों में भी ऊर्जा पहुँच पाती है, एवं पहली ही बार में ही पूर्ण क्रॉस-लिंकिंग हो जाती है। इससे उत्पादन समय कम हो जाता है, एवं लैंप/रिफ्लेक्टर की सफाई की आवश्यकता भी कम हो जाती है।
स्थापना संबंधी नोट:
इस लैंप की स्थापना हेतु उसकी दिशा एवं आसपास की स्थितियाँ महत्वपूर्ण हैं। यह लैंप बहुत ही मजबूत है, लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि लैंप के आसपास की हवा का प्रवाह उसकी ऊष्मा उत्पादन क्षमता के अनुरूप हो। अपने मौजूदा बैलास्ट के साथ वोल्टेज एवं कनेक्टर की सुसंगतता की जाँच करें। साथ ही, अपने सब्सट्रेट के फोटोइनिशिएटर की तरंगदैर्घ्यें भी लैंप के आउटपुट प्रोफाइल के अनुरूप होनी चाहिए। पहले ही शिफ्ट में लैंप की ऊष्मा संबंधी जानकारी लेकर उसकी कार्यक्षमता को सुनिश्चित करें।